21.8.07

उद्धरण एक कविता से

और चिता पर जाये उड़ेला
पात्र ना घृत का पर प्याला ,
घंट बंधे अंगूर लता से
मध्य ना जल हो पर हाला ,
प्राणप्रिय अगर श्राद्ध करो तुम मेरा , तो ऐसे करना,
पीने वालों को बुलवा कर खुलवा देना मधुशाला



- मधुशाला ( हरिवंश राय बच्चन)



हिंदी चिटठा लिखने की शरुआत है , टीका-टिप्पणी एंव चर्चा स्वागत योग्य है

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