और चिता पर जाये उड़ेला
पात्र ना घृत का पर प्याला ,
घंट बंधे अंगूर लता से
मध्य ना जल हो पर हाला ,
प्राणप्रिय अगर श्राद्ध करो तुम मेरा , तो ऐसे करना,
पीने वालों को बुलवा कर खुलवा देना मधुशाला
- मधुशाला ( हरिवंश राय बच्चन)
हिंदी चिटठा लिखने की शरुआत है , टीका-टिप्पणी एंव चर्चा स्वागत योग्य है
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
0 comments:
Post a Comment